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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 76
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादिममद्भुतम्।

केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः।।76।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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