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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 43
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

शौर्यं तेजो धृतिदाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्।

दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।।43।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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