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अध्याय 2 — सांख्य योग

श्लोक 2-3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् ।

अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ॥2॥


क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते ।

क्षुद्रं हृदयदौबल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परंतप ॥3॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

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