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अध्याय 2 — सांख्य योग

श्लोक 55
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

प्रजहाति यदा कामान् सर्वान् पार्थ मनोगतान् ।

आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ॥55॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

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