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अध्याय 2 — सांख्य योग

श्लोक 25
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते।

तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमहेसि।।25।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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