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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 28
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो: ।

गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते॥28॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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