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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 37
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

|| श्री भगवानुवाच ||काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भव: ।

महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥37॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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