भाषा चुनें:

अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 16
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः ।

अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ॥16॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

Gita Prerna Logo
Go Back Top