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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 35
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।

स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह: ॥35॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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