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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 13
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा।

अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा ।।1131 11

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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