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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 35
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ संजय उवाच ॥

एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृतांजलिर्वेपमानः किरीटी।

नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ॥35॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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