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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 37
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकत्रै।

अनन्तदेवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत् ॥37 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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