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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसंघान् ।

ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ।। 15 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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