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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 9
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ संजय उवाच ॥

एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः ।

दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥9॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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