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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 36
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च ।

रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसंघाः ॥36॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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