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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 25
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि दृष्टैव कालानल सन्निभानि ।

दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास ।। 25 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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