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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 8
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।

दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥ 8 ।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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