भाषा चुनें:

अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 17
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् ।

पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्क द्युतिमप्रमेयम् ॥17॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top