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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 49
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदूंममेदम् ।

व्यपेतभीः प्रीतमनाः पनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य ॥ 49 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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