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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 53
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।

शक्य एवं विधोद्रष्टं दृष्टवानसि मां यथा ।।53 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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