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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर।

द्रष्टमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥3 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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