भाषा चुनें:

अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 13-14
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

चातुर्वर्ण्य मया सृष्टं गुणकर्म विभागशः ।

तस्य कर्तारमपि मां विद्धयकर्तारमव्ययम् ॥ 13 ॥

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा।

इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ।। 14 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


अंतिम श्लोक
Gita Prerna Logo
Go Back Top