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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 6
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन्।

प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय संभवाम्यात्ममायया II 6II

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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