भाषा चुनें:

अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 35
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यज्ज्ञात्वा न पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव ।

येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि ॥35॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top