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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः।

भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्।। 3।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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