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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 23
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः ।

यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते ॥23॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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